CBSE 12th Exam 2026: सीबीएसई का बड़ा फैसला, 12वीं के रिजल्ट के बाद मार्क्स वेरिफिकेशन की सुविधा बंद

CBSE 12th Exam 2026: सीबीएसई का बड़ा फैसला, 12वीं के रिजल्ट के बाद मार्क्स वेरिफिकेशन की सुविधा बंद

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (CBSE) की 12वीं की बोर्ड परीक्षा के परिणाम में छात्रों के लिए अंक सत्यापन (मार्क वेरिफिकेशन) कराने की सुविधा बंद हो जाएगी। दरअसल, बोर्ड इस बार 12वीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के साथ पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराने जा रहा है।

परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि 2026 में 12वीं की परीक्षा

अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रहेगी। शुक्रवार को सीबीएसई अधिकारियों ने संबद्ध विद्यालयों के शिक्षकों और कुलपतियों के लिए आयोजित एक कार्यशाला में यह जानकारी दी। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि 2026 में 12वीं की परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में ऑन स्क्रीन मार्किंग की जाएगी। डिजिटल मूल्यांकन की इस प्रक्रिया के बाद अंकों की गिनती में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। ऐसे में छात्रों के लिए परिणाम घोषित होने के बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रहेगी।

परीक्षा नियंत्रक भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड इस बार सिर्फ 12वीं की परीक्षा के लिए यह सुविधा लागू कर रहा है। इस बार होने वाली दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कॉपियों का मूल्यांकन ‘मैनुअल’ यानी शिक्षकों के द्वारा ही किया जाएगा।

पुरानी व्यवस्था में कई बार इंसान भूलों के चलते अंक जुड़ने से रह जाते थे। परिणाम के बाद छात्र अंक सत्यापन को आवेदन करते थे, जिसके बाद कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन होता था।

शिक्षक कंप्यूटर पर उन्हें देखकर अंक देते हैं

ऑन स्क्रीन मार्किंग डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इसमें उत्तर पुस्तिका को हाथों से चेक नहीं किया जाता। शिक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका को कंप्यूटर पर चेक करेंगे। छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं पहले स्कैन की जाती हैं। इसके बाद ये कॉपियां सुरक्षित ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड होती हैं और शिक्षक कंप्यूटर पर उन्हें देखकर अंक देते हैं। इस सिस्टम में सॉफ्टवेयर खुद ही कुल अंक जोड़ देता है, जिससे टोटलिंग की गलती की संभावना खत्म हो जाती है। अभी तक कई बार हाथ से जोड़ने में गलती हो जाती थी, जिससे छात्रों को बाद में सत्यापन के लिए आवेदन करना पड़ता था।

इस नए सिस्टम की एक खास बात यह है कि शिक्षकों को अब कॉपी जांचने के लिए किसी मूल्यांकन केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने ही स्कूल में सर्वे, नियमित काम करते हुए कॉपियों का मूल्यांकन कर गिनती। इससे समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत होगी और ज्यादा शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल हो गिनती।

सीबीएसई की 12वीं और दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं। बोर्ड से भारत और दुनिया के 26 देशों में 31,000 से ज्यादा स्कूल जुड़े हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की बोर्ड परीक्षाएं जल्द ही शुरू होने वाली हैं। इसके पहले बोर्ड की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने बोर्ड परीक्षा 2026 की तैयारी, अनुशासन नियम और डिजिटल मूल्यांकन सहित कई मुद्दों के बारे में जानकारी दी। सीबीएसई ने परीक्षा अनुशासन को सबसे अहम बताया है। इसके साथ ही CBSE में हुए वेबिनार का भी जिक्र किया है।

इस वेबिनार की अध्यक्षता डॉ. संयम भारद्वाज ने की। हालांकि, इसकी शुरुआत सीबीएसई चेयरपर्सन राहुल सिंह की ओर से की गई।

अनुशासन और छात्रों के व्यवहार पर फोकस

CBSE ने वेबिनार के दौरान परीक्षा अनुशासन को सबसे अहम मुद्दा बताया। इसके साथ ही वेबिनार से अपील की कि CBSE की ओर से हुए वेबिनार को अच्छी तरह से समझाएं और बच्चों को ईमानदारी से एग्जाम देने के लिए प्रेरित करें। इसके साथ छात्रों से भी परीक्षा केंद्रों पर समय से पहुंचने और दिए गए सभी परीक्षाओं का पालन करने के लिए कहा है।

अफवाहों से दूर रहने की दी सलाह

डॉ. भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और फर्जी वीडियो को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि छात्र किसी भी तरह की सोशल मीडिया पर आ रही अफवाहों पर ध्यान देने से बचें। छात्र केवल बोर्ड की अफवाहों की सूचना पर ध्यान दें। इसके साथ ही अफवाह फैलाने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।

46 लाख छात्र होंगे शामिल

CBSE ने यह भी बताया कि इस साल बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन बड़े लेवल पर किया जा रहा है। लगभग 31 हजार से ज्यादा स्कूलों और 26 देशों में फैले केंद्रों से करीब 46 लाख छात्र परीक्षा देंगे। इसके लिए दुनिया भर में 8 हजार से ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। कक्षा 10 की परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू होंगी, जो 11 मार्च 2026 तक चलेंगी। वहीं कक्षा 12 की परीक्षाएं भी 17 फरवरी से शुरू होंगी और 10 अप्रैल 2026 तक चलेंगी।

तीन बड़े बदलावों पर फोकस

वेबिनार के दौरान CBSE ने परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए तीन बड़े बदलावों का ऐलान किया है। बोर्ड की ओर से इन उद्देश्यों का मूल्यांकन में गलत को कम करना, विषय-विशेष मूल्यांकन को बेहतर बनाना और पूरी परीक्षा को अधिक छात्र-अनुकूल बनाना है.

10वीं के छात्रों को दूसरी बोर्ड परीक्षा में मौका दिया जाएगा, इससे वह अपने प्रदर्शन को सुधारेंगे.

कक्षा 12 की कॉपियों की जांच अब डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से होगी.

कक्षा 10 के विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्रों को विषयवार भागों में बांटा गया है.

ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम कैसे काम करेगा?

बता दें कि नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के तहत 12वीं कक्षा की कॉपियों को स्कैन करके डिजिटल तरीके से जांचा जाएगा. प्रशिक्षित शिक्षक कंप्यूटर के माध्यम से मूल्यांकन करेंगे, जिससे जोड़-घटाव या पोस्टिंग जैसी गलत की संभावना कम हो जाएगी.

सीबीएसई ने बताया कि मूल्यांकन शुरू होने से पहले शिक्षकों को इस लेकर ट्रेनिंग दी जाएगी.

डिजिटल मूल्यांकन से क्या होगा फायदा

वेबिनार में बोर्ड ने डिजिटल मूल्यांकन से होने वाले फायदों के बारे में भी बात की है. उन्होंने बताया कि इस सिस्टम के ज़रिए नंबरों को जोड़ने और अपलोड करने में होने वाली गलतियां खत्म होंगी। शिक्षक अपने ही स्कूल से कॉपियां चेक कर गिनती। इससे उन्हें यात्रा कम करनी होगी और मूल्यांकन प्रक्रिया तेज होगी।

Leave a Comment